संपादकीय......

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गुरूब्रह्म गुरूर्विष्णु गुरूर्देवो महेश्वराः।।

गुरू साक्षात् परंब्रह्मः तस्मै श्रीगुरवे नमः।।

दिल्ली डेवलपमेंट ऑथोरिटी की तरफ से इस कालोनी का प्रवास सन १९७३ मे एल.आई.जी कालोनी के रूप मे हुआ था। जिसमे सी-३ ब्लाक के फ्लैट स्टेट बैंक के कर्मचारियों को दिये गये थे ! इसी स्थान पर पीछे चबूतरे पर छोटा सा प्राचीन शिवालय पीपल के वृक्ष के नीचे था । आसपास के श्रद्धालु जन इस शिवालय मे प्रति दिन पूजा अर्चना के लिये आते थे।

सन १९७५ से शिव भक्तो की एक मंडली द्वारा इस स्थान के पुनः नव निर्माण का शुभ कार्य प्रारंभ हुआ। दिन प्रति दिन मंदिर अपनी प्रगति

की ओर बढ़ने लगा। मंदिर परिसर की चहुमुखी प्रगति के साथ साथ सन १९९८ मे श्री आशुतोष पारदेशवर धाम की स्थापना ( १५१ किलो पारे के शिवलिंग ) महा शिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री जगद गुरु शंकराचार्य अखिलेश्वर जी महाराज के करकमलों द्वारा हुई।

उसी दिन से मंदिर अपने सनातन संस्कृति की पूर्ण परम्पराये निभाते हुए राष्ट्र व्यापी रूप ले चुका है। तथा वर्तमान समय मे मंदिर ३५ सामाजिक एवं धार्मिक सेवाओ से जुड़ा हुआ है।