उत्सव एवं त्यौहार

उत्सव एवं त्यौहार

सनातन धर्म के आधार पर वर्ष भर पर्वों, व्रतों, उत्सवों, जन्मोत्सवों का क्रम चलता रहता है। श्री पारदेश्वर धाम मंदिर में विशेष से मनाए जाने वाले नव संवत से नवरात्र आरम्भ तक - श्री दुर्गा अष्टमी, श्री रामनवमी, श्री हनुमान जयंती, गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी-गुरुपूर्णिमा एवं श्रवण मास में भगवन शिव की पूजा और अभिषेक और रक्षाबंधन होता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी और छठ का आयोजन बहुत धूम धाम से सम्पन्न होता है। तथा शरद नवरात्री में विजयादशमी, दीपावली, अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, तुलसी विवाह लोहरी, संक्रांति पर्व तथा महाशिवरात्रि में भक्त जनो के द्वारा दिन भर पूजन अर्चन के पश्चात् रात्रि ७ बजे से प्रातः प्रातः ६ बजे तक १०८ दम्पत्तियों द्वारा सहस्त्र धारा द्वारा महारुद्राभिषेक का पूजन विशेष दर्शनीय होता है।

होलिकोत्सव आदि सभी प्रमुख पर्व मंदिर में बड़े धूम धाम और आस्था के साथ मनाए जाते है। इन पर्वो में मंदिर में भक्त जनों की अपार भीड़ उपस्थित होती है।

मंदिर कार्यकारिणी के द्वारा पर्वों उत्सवों में विशेष रूप से व्यवस्था और सुविधा भक्त जनों को प्राप्त कराने के अथक् प्रयास किये जाते है। प्रत्येक पूर्णमासी को भगवान सत्य नारायण की कथा आरती एकादशी कथाएँ एवं साप्ताहिक कथाएँ मंदिर के पुजारियों द्वारा संपन्न करवाई जाती है ।

समय - समय पर विद्वानो संतो महापुरुषों द्वारा पौराणिक कथा सत्संग संकीर्तन के आयोजन सम्पन्न होते है । पर्व आयोजनो पर मंदिर में विशाल भंडारे भी चलते रहते हैं। श्री पारदेश्वरधाम में पूजन अर्चन करके भक्तगण विशेष सुखशांति का अनुभव करते हैं। तथा हम सभी मंदिर के कार्यकारिणी के सदस्य एवं सेवारत जनों का यही मूल उद्देश्य है ।

मंदिर द्वारा मनाए गए उत्सव की झलक

शिवरात्रि महा पर्व

किसी भी उत्सव पर मंदिर प्रागण मे एक दिन के भंडारे की शुल्क राशि ११००० हजार रुपए है ।

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