श्री पारदेश्वरधाम मंदिर

श्री पारदेश्वरधाम मंदिर का उद्देश्य तथा लक्ष्य

गुरूब्रह्म गुरूर्विष्णु गुरूर्देवो महेश्वराः।।

गुरू साक्षात् परंब्रह्मः तस्मै श्रीगुरवे नमः।।

पारदेश्वर भगवान का धाम भक्तों को अध्यात्मत्म लाभ प्रदान कर रहा है। यह लोगों को प्रेरणा दायक भी सिद्ध हुआ है। यह खुशी की बात है कि पिछले वर्ष ही एक अन्य पारे के लिंग की स्थापना गुजरात राज्य के आनन्द जिले के भव्य मन्दिर में हुई उसमें आपकी संस्था के सदस्यों को बुलाया गया और भाग भी लिया।

श्री पारदेश्वरधाम का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक सेवा के साथ जनसेवा भी है ‘नर सेवा-नारायण सेवा, सेवा में ही आनन्द है’ का महान् कार्य होता है। इसलिए एम्बुलेंस सेवा के साथ अन्य सेवाएँ भी चल रही हैं। जिनका इस पुस्तक में विवरण है तथा ‘धाम दर्पण’ का सौलहवाँ अंक सहर्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। पारदेश्वर धाम के साथ अनेक लोग समर्पित भावना से जुड़े हैं। मैं मन्दिर के अर्चकों, सेवकों के कार्य की सराहना करता हूँ। समस्त दानदाताओं का उनके द्वारा समय-समय पर दिए हुए सहयोग एवं प्रेरणा के प्रति आभारी हूँ। मन्दिर के समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों के तन-मन-धन पूर्वक सहयोग के कारण मन्दिर पारदेश्वर धाम प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मैं पारदेश्वर भगवान से कामना करता हूँ कि भविष्य में भी मन्दिर सभी समाज सेवा हेतु प्रगति करता रहे।

आज दिन इस मंदिर से लगभग सामाजिक सेवाएं आदिशक्ति माँ एवं भोले बाबा के संरक्षण में चल रही हैं। मुझे गर्व हो रहा है कि भारत के प्रत्येक मन्दिर ऐसी ही सामाजिक सेवा करता रहे तो अपने आप में ही राम राज्य आ जाएगा। आज दिन इस मन्दिर का सभी समाज के योगदान से ये स्वरूप बना है। मैं तो केवल इसका प्रतिनिधि हूँ, निधिप्रति नहीं हूँ। प्रभु से मेरी एक ही प्रार्थना है कि जब तक मुझे अपने चरणों में सेवा पर रखे, तो मुझ पर स्वास्थ्य व सद्बुद्धि की कृपा रखें। स्मारिका में किसी प्रकार की कोई त्रुटि रह गई हो तो हम क्षमाप्रार्थी हैं साथ ही हमें सूचित अवश्य करें। कोशिश करेंगे कि भविष्य में गलती न हो। आपका सेवक राजेन्द्र प्रसाद बंसल दो वर्ष से लावारिस अस्थि विसर्जन सेवा और शुरू कर दी गई है। 36 दुनिया को जो हिला दे, उसे तूफान कहते हैं। तूफान से जो ले टक्कर, उसे इंसान कहते हैं।। इरादे हों अटल, राह खुद चलकर आती है। दरिया देते हैं रास्ते, चट्टाने थरथराती हैं।।